विधानसभा में फिर गूंजा कूटेश्वर पुल का मुद्दा,विधायक संजय पाठक ने विभागीय उदासीनता को बताया जिम्मेदार।

 विधानसभा में फिर गूंजा कूटेश्वर पुल का मुद्दा,विधायक संजय पाठक ने विभागीय उदासीनता को बताया जिम्मेदार।

कटनी:

मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक ने बरही-मैहर मार्ग पर स्थित कूटेश्वर पुल के तीन साल से बंद पड़े होने का मुद्दा शून्यकाल में उठाया। उन्होंने शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए आग्रह किया कि इस पुल का शीघ्र मरम्मत कार्य कराया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।  

      पुल की बंदी से हजारों लोग प्रभावित:

विधायक संजय पाठक ने कहा कि जलसंसाधन विभाग (बाणसागर परियोजना) के अधीन आने वाले इस पुल का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल के बंद होने के कारण लोगों को 60 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इसके चलते क्षेत्र के छात्र-छात्राओं, बीमारों, गर्भवती महिलाओं, किसानों और व्यापारियों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।  

   प्रशासनिक लापरवाही से नहीं हो रहा कार्य:

उन्होंने आगे बताया कि इस पुल के मरम्मत कार्य को लेकर अब तक तीन बार टेंडर निकाले जा चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और रुचि न लेने के कारण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया। अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी आधार पर टेंडर निरस्त होने का भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रशासन की इच्छाशक्ति की कमी के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।  

          क्षेत्रीय जनता में बढ़ रहा आक्रोश:

विधायक संजय पाठक ने कहा कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत न होने से आमजन में भारी आक्रोश है। इस समस्या को लेकर कई बार जन आंदोलन भी हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुल का बंद होना न केवल स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, बल्कि इस मार्ग से गुजरने वाले पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और व्यापारियों के लिए भी एक बड़ी बाधा बन चुका है।  

        शासन से शीघ्र कार्यवाही की मांग:

उन्होंने सरकार से मांग की कि संबंधित विभाग को जल्द से जल्द निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो क्षेत्रीय जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है तथा व्यापक जन आंदोलन खड़ा हो सकता है।  

          लंबे समय से चल रही है समस्या:

यह कोई पहली बार नहीं है जब कूटेश्वर पुल का मुद्दा उठा हो। पहले भी कई बार इस समस्या को शासन और प्रशासन के समक्ष रखा गया है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। इस पुल का बंद होना केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि एक व्यापक परिवहन अवरोध भी है, जिससे राज्य के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों का संपर्क बाधित हो रहा है।  

      जनता को जल्द राहत देने की जरूरत:

यह आवश्यक है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द आवश्यक बजट स्वीकृत कर पुल के मरम्मत कार्य को पूर्ण करवाए। यह पुल केवल एक संरचना मात्र नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण साधन है। यदि इस पर शीघ्र कार्यवाही नहीं की गई, तो जनता का असंतोष और बढ़ सकता है, जिससे सरकार के प्रति विश्वास भी प्रभावित हो सकता है।


प्रधान संपादक:अज्जू सोनी, ग्रामीण खबर mp,
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