विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की खेती और उपयोग का तकनीकी प्रशिक्षण।

 विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की खेती और उपयोग का तकनीकी प्रशिक्षण।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस कटनी में स्वरोजगार हेतु व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम ।

कटनी:

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कटनी में उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत औषधीय पौधों की खेती एवं उनके उपयोग का तकनीकी प्रशिक्षण शुरू किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ स्वरोजगार स्थापित करने हेतु विद्यार्थियों को सक्षम बनाना है।  

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन प्रशिक्षक रामसुख दुबे द्वारा किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की खेती, उनके संरक्षण और औषधीय उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का निरीक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुनील कुमार बाजपेई एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉक्टर व्ही. के. द्विवेदी द्वारा किया गया।  

डॉ. बाजपेई ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त ज्ञान का उपयोग स्वरोजगार स्थापित करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को औषधीय खेती के महत्व और इससे मिलने वाले लाभों पर विस्तृत जानकारी दी।  

प्रशिक्षण समन्वयक डॉक्टर व्ही. के. द्विवेदी ने बताया कि स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत समय-समय पर रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे विद्यार्थी इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं।  

प्रशिक्षण कार्यक्रम में औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती के महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया। वर्तमान समय में जड़ी-बूटियों की खेती अत्यंत आवश्यक हो गई है क्योंकि वैश्विक और राष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग बढ़ रही है। साथ ही, अधिक उपज देने वाली प्रजातियों की उपलब्धता और कृषि एवं प्रसंस्करण तकनीकों की प्रगति ने इस क्षेत्र को और भी लाभदायक बना दिया है।  

प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को बताया गया कि औषधीय पौधों की खेती कम लागत में की जा सकती है और यह कम उपजाऊ एवं समस्याग्रस्त मिट्टी में भी अच्छी तरह उगाई जा सकती है। इस प्रकार की फसलों को घरेलू जानवरों और पक्षियों से नुकसान होने की संभावना भी कम रहती है। इसके अतिरिक्त, औषधीय पौधों में कीट एवं रोगों का प्रभाव भी अन्य फसलों की तुलना में कम होता है, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।  

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पौधों की जड़, तना, पत्तियां, फूल, फल, बीज और छाल के औषधीय उपयोग की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही, आधुनिक तकनीकों द्वारा इन पौधों की अधिक मात्रा में उत्पाद प्राप्त करने के तरीके भी सिखाए गए।  

यह तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने के साथ-साथ पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।


प्रधान संपादक:अज्जू सोनी
संपर्क सूत्र:9977110734

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