पथवारी रेलवे अंडर ब्रिज बना जानलेवा जाम और हादसों का अड्डा, प्रशासन की अनदेखी से बढ़ी मुसीबत।
रेलवे प्रशासन की लापरवाही के कारण क्षेत्रीय जनता परेशान, स्कूली बच्चों और आम लोगों के लिए बना बड़ा संकट।
पथवारी,विलयतकला:
पथवारी रेलवे अंडर ब्रिज, जो कभी सुगम यातायात का मार्ग माना जाता था, आज खतरनाक हादसों और लंबे जाम का केंद्र बन चुका है। समाजसेवी गणेशपुरी गोस्वामी ने बताया कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले दो-तीन वर्षों से लगातार बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के लिए यह जाम अब रोजमर्रा की परेशानी बन गया है। जब भी यहां भारी वाहन या छोटी गाड़ियां फंसती हैं, तो स्थिति भयावह हो जाती है। सौभाग्य की बात यह है कि पास में ही अल्ट्राटेक सीमेंट पुट्टी प्लांट स्थित है, जिसके कारण कंपनी अपने संसाधनों, जैसे जेसीबी आदि, को भेजकर जाम को खुलवा देती है, ताकि उनका काम बाधित न हो। लेकिन यदि यह सुविधा न मिले, तो जाम 24 से 36 घंटे तक बना रहता है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
यह अंडर ब्रिज बारिश के मौसम में और भी खतरनाक हो जाता है। पानी भर जाने से यहां वाहनों की आवाजाही रुक जाती है और लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर पानी से गुजरना पड़ता है। सड़क की हालत भी बदतर हो चुकी है। बड़े-बड़े गड्ढों के कारण कई वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं।
गणेशपुरी गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने स्वयं तीन बार रेलवे डीआरएम को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ छोटे-मोटे ठेकेदारों से लीपापोती करवा दी जाती है। रेलवे प्रशासन द्वारा ठोस कदम न उठाने के कारण यह समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।
फिलहाल परीक्षा का समय चल रहा है और इस समस्या से स्कूली बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई बार स्कूली बसें इस जाम में घंटों तक फंसी रह जाती हैं, जिससे बच्चे परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाते। कई अभिभावकों ने इस विषय में चिंता जताई है और रेलवे प्रशासन से तुरंत समाधान की मांग की है।
स्थानीय लोग बार-बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। लेकिन रेलवे विभाग और नगर निगम की उदासीनता के कारण आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह समस्या आने वाले समय में और भी विकराल रूप ले सकती है।
क्षेत्रीय जनता ने प्रशासन से मांग की है कि इस अंडर ब्रिज की मरम्मत करवाई जाए, सड़क को ठीक किया जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को इस मुसीबत से राहत मिल सके। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन कब इस समस्या को गंभीरता से लेता है और कब तक समाधान निकालता है।